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डा. पी जी राव, एम टेक, पी एच डी
निदेशक

उत्‍तर-पूर्व विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्‍थान
(पूर्व क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला) जोरहाट
– 785006, आसाम,भारत

 

डा. पारचुरी गंगाधर राव, उप-निदेशक एवं प्रभागाध्‍यक्ष रासायनिकी अभियांत्रिकी प्रभाग, केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्‍थान ( सी एल आर आई), चेन्‍नई की नियुक्ति क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला, जोरहाट में उसके सातवें निदेशक के रूप में 18 नवम्‍बर 2002 में हुई । आर आर एल, जोरहाट देश के पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में स्‍थापित एक मात्र राष्‍ट्रीय प्रयोगशाला है जिसका मुख्‍य उद्येश्‍य इस क्षेत्र में उपलब्‍ध विपुल प्राकृतिक संपदाओं का उपयोग एवं विज्ञान तथा प्रौद्यागिकी से क्षेत्र के आर्थिक विकास में सक्रिय रहना है । यहॉं 488 स्‍टाफ कार्यरत हैं जिनमें लगभग 175 वैज्ञानिक तथा तकनीकी से जुड़े हैं । डा. पी जी राव एक लब्‍धप्रतिष्ठित रसायनिकी अभियंता हैं । इन्‍होंने रसायनिकी में बी टेक की डिग्री आरईसी एनआईटी, वारंगल से 1974 में दक्षता के साथ प्राप्‍त किया एवं रसायनिकी प्‍लांट डिजायन क्षेत्र में आई आई टी, मद्रास से 1976 में एम टेक की डिग्री हासिल किया । पॉलिमर अभियांत्रिकी के क्षेत्र महत्‍त्‍वपूर्ण शोध के लिए उन्‍हें आई आई टी, मद्रास ने 1995 में पी एच डी की उपाधि प्रदान किया । आरंभ में डा. राव ने 1976 में आर आर एल, जोरहाट में वैज्ञानिक सहायक के रूप में कार्य शुरू किया । कठिन प्ररिश्रम में केंद्रीत अनुसंधान के कारण वे 1986 में वैज्ञानिक ई-।। स्‍तर पर जल्‍द ही पहुँच गए । वे एग्रोकेमिकल्‍स जैसे फॉस्‍फामिडॉन, क्विनोलफॉस एवं क्‍लोरोफेनव्हिफॉस के रसायनिक प्रक्रम विकास में संलग्‍न रहे जिसके लिए आर आर एल, जोरहाट को सन 1982 में फिक्‍की पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ । वे प्रोसेस डिजाइन विकास एवं इंजीनियरिंग समूह तैयार करने में जुटे रहे जिसके द्वारा आठ मौलिक अभियांत्रिकी पैकेज प्रस्‍तुत किया गया जिसमें पॉच वाणिज्यिक रूप से सफल हुआ । इसके साथ ही, वे फ्लो एडिटिव्‍स, बॉम्‍बे हाई के कच्‍चा तेल पाईप लाइन नेटवर्क में मल्‍टीफेज फ्लो के मॉडलिंग एवं सिमुलेशन, रसायनिक प्रक्रम प्‍लांट में खतरा विश्‍लेषण क्षेत्र के अनुसंधान में भी योगदान दिया । डा. राव ने आर आर एल, जोरहाट में पहली कंप्‍यूटर सुविधाऍं एवं सॉफ्टवेयर विकास की जिम्‍मेवारी भी उठायी । 1991 में, डा. राव ने वैज्ञानिक ई-।। के तौर पर केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्‍थान, चेन्‍नई में केंद्रीय डिजाइन अभियांत्रिकी प्रकोष्‍ठ के प्रधान के रूप में योगदान किया । यहॉं वे वर्ष 1996 में वैज्ञानिक एफ बन गए एवं रसायनिकी अभियांत्रिकी प्रभाग के प्रधान की जिम्‍मेवारी भी उन्‍हें सौंपी गयी । लगातार 2002 तक महत्‍त्‍वपूर्ण अनुसंधान विकास, प्रौद्योगिकी विकास, औद्यागिक प्रयुक्ति एवं अनुसंधान तथा विकास प्रबंधन का कार्य किया । सी एल आर आई, चेन्‍नई में डा. राव का महत्‍त्‍वपूर्ण योगदान चर्म रसायकनिकी विकास प्रक्रम क्षेत्र, चर्म रसायनिकी प्‍लांट का डिजाइन, टेनेरीज, टेनेरीज में प्रोसेस नियंत्रण तंत्र का डिजाईन एवं कार्यान्‍वयन, टेनरीज का आधुनिकीकरण, चर्म कॉम्‍पलेक्‍स का डिजाईन, टेक्‍नो-इकॉनोमिक फिजीबिलीटी रिपोर्ट तैयार करना, टेनरीज में क्‍लीनर प्रौद्योगिकी का कार्यान्‍वयन, टेनरीज में गुड हाउस कीपिंग (जी एस के) प्रयोग के लिए जनजागृति उत्‍पत्ति, आदि । डा. राव, चर्म प्रौद्योगिकी मिशन के माध्‍यम से विभिन्‍न परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन भी संलग्‍न रहे जो सी एस आई आर का सफल मिशन बना । मौलिक अनुसंधान के क्षेत्र में डा. राव ने चार्ज ट्रांसफर पॉलिमेराइजेशन और इसके मॉडलिग क्षेत्र में, चर्म प्रोसेसिंग में पावर अल्‍ट्रासाउंड की प्रयुक्ति के क्षेत्र में भी योगदान दिया । डा. राव, उन्‍नत अनुसंधान प्रशिक्षण एवं परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन के सिलसिले में कई देशों यथा जर्मनी, हॉलेंड, इटली, यू एस ए, मलेशिया, श्री लंका एवं बंगलादेश का दौरा किया । उनके नाम से पीअर रिव्‍यूड अंतर्राष्‍ट्रीय जर्नल में 44 अनुसंधान पत्र, 24 भारतीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं जबकि 70 अनुसंधान पत्र राष्‍ट्रीय तथा अतंर्राष्‍ट्रीय संगोष्ठियों में प्रस्‍तुत किये जा चुके है, इसके अलावा 2 पेटेंट, 3 कॉपीराइट्स एवं दो किताबों में चेप्‍टर भी इनके नाम हैं । इन्‍होंने दो पी एच डी छात्रों को गाइड किया और वर्तमान में तीन को गाइड कर रहे हैं । डा. राव भारतीय रसायनिकी अभियांत्रिकी संस्‍थान के फेलो हैं और आई सी एच ई के भूतपूर्व अध्‍यक्ष हैं । विभिन्‍न महत्‍त्‍वपूर्ण संगठनों के वे आजीवन सदस्‍य हैं जैसे लॉस प्रिबेंसन एसोशिएसन ऑफ इंडिया, एड्मिनिस्‍ट्रेटिव स्‍टॉफ कॉलेज ऑफ इंडिया, मद्रास साइंस सोसायटी एवं असम साईस सोसायटी ।

 

 

 

 
 
     
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